मराठा आरक्षण पर निकाली वैकेंसी

मुंबई – बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने वाले नए कानून के तहत नौकरी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने पर महाराष्ट्र सरकार को आड़े हाथ लिया, क्योंकि इसे चुनौती देने वाली याचिकाएं अदालत में विचाराधीन हैं। अदालत ने कहा कि, इस तरह की ‘गैरजरूरी स्थितियों’ से बचा जाना चाहिए और सरकार को याचिकाएं सुनने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए।
चीफ जस्टिस नरेश पाटिल और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच ने सरकार से पूछा कि, उसे इन पदों को भरने की इतनी जल्दी क्यों है, जबकि वह जानती है कि मराठा आरक्षण के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। बेंच मराठा आरक्षण के मुद्दे से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
कुछ याचिकाओं में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले को चुनौती दी गई है, जबकि अन्य याचिकाओं में सरकार के फैसले का समर्थन किया गया है। कानून को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में वकील गुणरतन सदावरते ने अदालत को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग द्वारा नौकरियों के लिए आवेदन मंगाने के लिए जारी विज्ञापन दिखाया।
उन्होंने कहा कि, आवेदन मराठा समुदाय के लिए नई सामाजिक एवं शैक्षिणक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) के तहत भी आमंत्रित किए गए हैं। सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वीके थोराट ने कहा कि केवल आवेदन मंगाए गए हैं और नौकरी के लिए अंतिम परीक्षा जुलाई 2019 में होगी। पद भरने की पूरी प्रक्रिया में छह महीने से अधिक समय लगेगा।
मराठा समुदाय को आरक्षण देने से जुड़े नए कानून के खिलाफ हाई कोर्ट में पीआईएल दायर करने वाले वकील पर अदालत परिसर के बाहर सोमवार को हमला किया गया। पुलिस ने बताया कि यह घटना उस वक्त हुई, जब याचिकाकर्ता गुणरत्न सदावरते मीडिया से बात कर रहे थे। कोर्ट के बाहर जुटी भीड़ में से एक शख्स आरक्षण के समर्थन में नारा लगाते हुए आगे आया और उन्हें पीटने लगा। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और वकीलों ने आरोपी को पकड़ लिया। उसकी पहचान जालना जिले के वैजनाथ पाटिल के तौर पर हुई। उसे आजाद मैदान पुलिस ने हिरासत में ले लिया और मामले की जांच की जा रही है।

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